₹1 लाख की FD, 7% सालाना ब्याज, तिमाही कंपाउंडिंग, 5 साल: मैच्योरिटी पर ₹1,41,478। यह बैंक की रसीद का नंबर है। अब इसमें से टैक्स और महंगाई घटाइए:
| आपका टैक्स स्लैब (सेस समेत) | टैक्स के बाद रकम | टैक्स के बाद सालाना रिटर्न | 6% महंगाई के बाद आज की कीमत |
|---|---|---|---|
| 0% (टैक्स नहीं) | ₹1,41,478 | 7.19% | ₹1,05,720 |
| 5.2% | ₹1,39,321 | 6.86% | ₹1,04,109 |
| 10.4% | ₹1,37,164 | 6.52% | ₹1,02,497 |
| 20.8% | ₹1,32,850 | 5.85% | ₹99,274 |
| 31.2% | ₹1,28,537 | 5.15% | ₹96,050 |
इसका मतलब
30% स्लैब वाले के लिए 7% की FD का टैक्स के बाद रिटर्न लगभग 5.15% रह जाता है। अगर महंगाई 6% रहे, तो 5 साल बाद पैसे की असली खरीदने की ताक़त आज से लगभग 4% कम होगी।
फिर भी FD क्यों?
- इमरजेंसी फंड और 1-3 साल के लक्ष्यों के लिए FD जैसी सुरक्षित, तय रिटर्न वाली जगह ज़रूरी है।
- DICGC हर बैंक में एक व्यक्ति के ₹5 लाख तक के जमा का बीमा करता है।
- लंबे लक्ष्यों (7 साल से ज़्यादा) के लिए सिर्फ़ FD पर टिके रहना महंगाई से हार सकता है।
हिसाब: हर साल जुड़े ब्याज पर उसी साल टैक्स (अनुमान), 6% सालाना महंगाई मानी गई। असली टैक्स आपकी कुल आय पर निर्भर है।
रकम, दर और अवधि बदलकर तुरंत देखिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
FD का ब्याज कब टैक्सेबल होता है?
कुल मिलाकर ब्याज हर साल की आय मानी जाती है, भले ही पैसा मैच्योरिटी पर मिले। इसे अपने रिटर्न में 'अन्य स्रोतों से आय' में दिखाना होता है।
सीनियर सिटीज़न के लिए क्या फ़र्क है?
ज़्यादातर बैंक 60 साल से ऊपर वालों को थोड़ा ज़्यादा ब्याज देते हैं, और उनके लिए टैक्स नियमों में कुछ अलग छूट हैं। अपने बैंक और टैक्स सलाहकार से पुष्टि करें।
