| समय | कुल निवेश | 10% पर अनुमानित फंड | 12% पर अनुमानित फंड |
|---|---|---|---|
| 5 साल | ₹3,00,000 | ₹3,90,412 | ₹4,12,432 |
| 10 साल | ₹6,00,000 | ₹10,32,760 | ₹11,61,695 |
| 15 साल | ₹9,00,000 | ₹20,89,621 | ₹25,22,880 |
| 20 साल | ₹12,00,000 | ₹38,28,485 | ₹49,95,740 |
| 25 साल | ₹15,00,000 | ₹66,89,452 | ₹94,88,175 |
| 30 साल | ₹18,00,000 | ₹1,13,96,627 | ₹1,76,49,569 |
आख़िरी 10 साल का जादू
12% पर 20 साल में फंड लगभग ₹50 लाख बनता है, और अगले 10 साल में ₹1.76 करोड़। यानी आख़िरी 10 साल में फंड साढ़े तीन गुना हो जाता है, जबकि निवेश सिर्फ़ ₹6 लाख बढ़ता है। इसे ही कंपाउंडिंग कहते हैं: पैसे पर कमाई, और उस कमाई पर भी कमाई।
रिटर्न का 2% भी बड़ा फ़र्क है
30 साल में 10% और 12% के बीच ₹62 लाख का अंतर है। इसलिए फंड चुनते समय खर्च (expense ratio) और डायरेक्ट प्लान जैसी छोटी बातें भी मायने रखती हैं।
ध्यान रखें
- 10% या 12% सिर्फ़ अनुमान हैं। इक्विटी फंड का रिटर्न कुछ सालों में नेगेटिव भी हो सकता है।
- महंगाई की वजह से 30 साल बाद ₹1.76 करोड़ की कीमत आज के ₹1.76 करोड़ जितनी नहीं होगी।
- बेचते समय कैपिटल गेन टैक्स लगता है; यह टेबल टैक्स से पहले की है।
हिसाब: हर किस्त महीने की शुरुआत में, मासिक कंपाउंडिंग (सालाना रिटर्न ÷ 12)।
रकम, दर और अवधि बदलकर तुरंत देखिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
₹5,000 की SIP से 1 करोड़ कितने साल में?
12% अनुमानित रिटर्न पर लगभग 26 साल में। 10% पर 30 साल में भी ₹1.14 करोड़ के आसपास।
बाज़ार गिरे तो SIP रोक दें?
गिरावट में SIP ज़्यादा यूनिट खरीदती है, जिससे औसत कीमत कम होती है। लंबे लक्ष्य के लिए SIP जारी रखना आमतौर पर बेहतर माना जाता है, पर फैसला अपनी स्थिति देखकर लें।
