मान लीजिए आपका ₹30 लाख का होम लोन 8.5% पर 20 साल के लिए है (EMI ₹26,035)। तीन साल बाद आपको बोनस मिला और आपने ₹2 लाख का प्रीपेमेंट किया। अब दो विकल्प हैं:
| विकल्प | नई EMI | लोन कब खत्म | कुल ब्याज | ब्याज की बचत |
|---|---|---|---|---|
| कोई प्रीपेमेंट नहीं | ₹26,035 | 240 महीने | ₹32,48,327 | - |
| अवधि घटाएँ | ₹26,035 | 211 महीने | ₹26,85,839 | ₹5,62,488 |
| EMI घटाएँ | ₹24,178 | 240 महीने | ₹30,69,584 | ₹1,78,743 |
अवधि घटाना क्यों जीतता है?
जब EMI वही रहती है, तो हर किस्त का बड़ा हिस्सा मूलधन चुकाने में जाता है और लोन लगभग 2.4 साल पहले खत्म हो जाता है। सिर्फ़ ₹2 लाख जमा करके ₹5.6 लाख ब्याज बचता है।
EMI घटाने से हर महीने ₹1,857 की राहत मिलती है, जो नौकरी या खर्च के अनिश्चित समय में काम की है, पर ब्याज की बचत एक-तिहाई से भी कम रह जाती है।
प्रीपेमेंट से पहले तीन जाँच
- इमरजेंसी फंड (कम से कम 6 महीने का खर्च) अलग रखें; लोन में डाला पैसा वापस निकालना आसान नहीं।
- प्रीपेमेंट चार्ज: फ्लोटिंग रेट होम लोन पर ज़्यादातर बैंक चार्ज नहीं लेते, फिर भी अपने लोन एग्रीमेंट में देखें।
- पुराने टैक्स रिजीम में होम लोन ब्याज पर छूट मिलती है; प्रीपेमेंट से वह छूट भी घटती है। नए रिजीम में यह छूट सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर पर नहीं मिलती।
हिसाब: प्रीपेमेंट 36वीं किस्त के बाद, दर पूरे समय 8.5%।
रकम, दर और अवधि बदलकर तुरंत देखिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या हर साल थोड़ा-थोड़ा प्रीपेमेंट करना ठीक है?
हाँ। शुरुआती सालों में किया गया हर प्रीपेमेंट सबसे ज़्यादा ब्याज बचाता है, क्योंकि तब बचा हुआ मूलधन सबसे बड़ा होता है।
प्रीपेमेंट करें या वही पैसा SIP में लगाएँ?
यह आपके लोन की दर, जोखिम लेने की क्षमता और टैक्स पर निर्भर है। प्रीपेमेंट से मिलने वाला 'रिटर्न' आपकी लोन दर के बराबर और बिना जोखिम का होता है; SIP का रिटर्न तय नहीं है।
