RBI ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 5.50% कर दिया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी है। अगर आपका होम लोन रेपो रेट से जुड़ा (floating) है, तो अगले रीसेट पर आपकी ब्याज दर भी लगभग इतनी ही बढ़ सकती है।
तब बैंक आमतौर पर पूछता है (या खुद तय कर देता है): EMI बढ़ाएँ या लोन की अवधि? उदाहरण: ₹30 लाख, 20 साल, ब्याज 8.50% से 8.75%।
| रास्ता | हर महीने EMI | कुल ब्याज | अवधि |
|---|---|---|---|
| पहले (8.50%) | ₹26,035 | ₹32,48,327 | 20 साल |
| EMI बढ़ाएँ (8.75%) | ₹26,511 | ₹33,62,717 | 20 साल |
| अवधि बढ़ाएँ (8.75%) | ₹26,035 | ₹35,72,072 | लगभग 21 साल |
फ़र्क कितना है?
EMI सिर्फ़ ₹477 महीना बढ़ाने पर कुल ब्याज ₹1.14 लाख बढ़ता है। वहीं EMI वही रखकर अवधि बढ़ाने पर लोन 13 महीने लंबा चलता है और कुल ब्याज ₹3.24 लाख बढ़ जाता है। यानी अवधि बढ़ाने का रास्ता लगभग ₹2.1 लाख ज़्यादा महँगा है।
क्या करें?
- अगर बजट में ₹477 महीने की जगह है, तो बैंक से EMI बढ़ाने को कहें।
- बैंक ने बिना पूछे अवधि बढ़ा दी हो तो अपने लोन स्टेटमेंट में बची अवधि ज़रूर देखें।
- हर साल एक एक्स्ट्रा EMI जितना प्रीपेमेंट भी बढ़ी हुई अवधि को वापस खींच सकता है।
हिसाब: ₹30 लाख, 20 साल का लोन, शुरुआत से ही दर 8.75% मानकर सरल तुलना। असली असर इस पर भी निर्भर है कि आपके लोन के कितने साल बीत चुके हैं और बैंक कितनी दर बढ़ाता है।
रकम, दर और अवधि बदलकर तुरंत देखिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या फिक्स्ड रेट होम लोन पर भी असर होगा?
नहीं, फिक्स्ड रेट अवधि के दौरान आपकी दर नहीं बदलती। असर रेपो या दूसरे बेंचमार्क से जुड़े फ्लोटिंग लोन पर होता है।
बैंक ने अपने आप अवधि बढ़ा दी, अब क्या?
आप बैंक को लिखित में EMI बढ़ाने का अनुरोध दे सकते हैं। बैंक के नियम अलग-अलग हैं, इसलिए ब्रांच या कस्टमर केयर से पुष्टि करें।
